सोमवार, 18 अप्रैल 2022

अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण में क्रीमी लेयर पात्रता का दायरा 15 लाख से ऊपर हो

 
द्वेष पूर्ण तरीके सेे अन्य पिछड़ा वर्ग के ऊपर थोपा गया विवादित पिछड़ा वर्ग आरक्षण आर्थिक लिमिट क्रीमी लेयर का जंजाल अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियोंं को आरक्षण से दूर करने तरीका बनता जा रहा है

आखिर क्या है क्रीमी लेयर

पहली बार यह शब्द केरल राज्य बनाम थामस मामले में 1975 में सुनाई दिया था जब एक न्यायाधीश ने कहा था कि आरक्षण का लाभ पिछड़े वर्ग की शीर्ष मलाईदार परत से छीना जाएगा इस प्रकार कमजोर मैं सबसे कमजोर और पूरा केक का उपयोग करने के लिए भाग्यशाली परतो को हटाया जाएगा सन 1992 में इंद्रमणि बनाम भारतीय संघ के फैसले ने राज्य की शक्तियों की सीमा निर्धारित की जिसमें 50% कोटा की छूट को बरकरार रखा और पिछड़ेपन की अवधारणा पर जोर दिया और पिछड़ेपन का पता लगाने के लिए 11 संकेत निर्धारित किए इस फैसले को गुणात्मक बहिष्कार की अवधारणा भी स्थापित की जैसे कि क्रीमी लेयर यह केवल ओबीसी पर ही लागू होगा मलाईदार परत मापदंड 1993 में एक लाख से अधिक 2004 में 2.5 लाख से अधिक 2008 में 4.5 लाख से अधिक और 2013 में 6 लाख से अधिक बा 2017 में 8 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले ओबीसी  क्रीमी लेयर के दायरे में आएंगे एवं उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा

यह व्यवस्था द्वेष पूर्ण क्यों है


सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों द्वारा निर्णय लिया गया था कि भविष्य में इस प्रकार की व्यवस्था एससी एवं एसटी कम्युनिटी पर भी लागू किया जाएगा लेकिन यह लागू नहीं किया गया

वही आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर सामान्य जतियों के लिए अतिरिक्त 10% आरक्षण में पात्रता सीमा  8 लाख वार्षिक एवं 5 हेक्टेयर भूमि रखा गया है जो कि अन्य पिछड़ा वर्ग केक क्रीमी लेयर के लगभग बराबर ही है

वर्तमान में केंद्र सरकार क्रीमी लेयर पर क्या चाहती है ?


देश की लगभग 60% आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग से आती है जो पूरी तरीके से कृषि एवं छोटे उद्योग धंधों पर निर्भर है अन्य पिछड़ा वर्ग की भारतीय राजनीति एवं सरकारी संस्थानों संसाधनों मैं सहभागिता बहुत ही कम है जिस प्रकार सरकार द्वारा क्रीमी लेयर की पात्रता मात्र अन्य पिछड़ा वर्ग के ऊपर ही लगती है वही आर्थिक आधार पर मात्र सामान्य जाति के लोगों को 10% आर्थिक आरक्षण देने के बाद एवं पात्रता सीमा ₹8 लाख वार्षिक से कम होने की निर्धारण सीमा के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय में नाराजगी व्याप्त है उसको कम करने के लिए सरकार विभिन्न अन्य पिछड़ा वर्ग के संगठनों से सुझाव लेकर क्रीमी लेयर पात्रता को मात्र ₹10 लाख वार्षिक आय तक करना चाहती है

कम से कम कितनी होनी चाहिए क्रीमी लेयर पात्रता सीमा

 अन्य पिछड़ा वर्ग के तमाम संगठनों द्वारा समय-समय पर क्रीमी लेयर जैसी द्वेष पूर्ण व्यवस्था को अन्य पिछड़ा वर्ग के ऊपर से हटाने की मांग सरकार से करते आ रहे हैं यदि किसी कारणवश सरकार इस व्यवस्था को अन्य पिछड़ा वर्ग के ऊपर से पूर्ण रूप से नहीं हटा पा रही है तो वह ऐसी व्यवस्था करें जिससे तमाम अन्य पिछड़ा वर्ग जो कि देश के विकास में अपना संपूर्ण योगदान देकर देश को प्रगति के मार्ग पर बढ़ा रहा है उस को ध्यान में रखते हुए क्रीमी लेयर की पात्रता सीमा 15 लाख तक करने का कार्य करें जिससे अन्य पिछड़ा वर्ग समाज में एवं देश में अपनी सहभागिता पूर्ण तरीके से निभा सके !

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ऑल इंडिया ओबीसी रेलवे एम्प्लायज एसोसिएशन - विशेष निर्देश

ऑल इंडिया ओबीसी रेलवे एम्प्लायज एसोसिएशन - विशेष निर्देश ऑल इंडिया ओबीसी रेलवे एम्प्लॉयी एसोसि...