संघर्ष से संगठित शक्ति तक
✍️ केंद्रीय महासचिव – श्री राजीव कुमार
भारतीय रेल देश की जीवनरेखा है और इसमें कार्यरत लाखों कर्मचारियों का योगदान ही इसे गति प्रदान करता है। लंबे समय तक ओबीसी कर्मचारी बिखरे हुए रहे, उनकी सामूहिक आवाज़ सुनी नहीं जाती थी। इसी कमी को दूर करने और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत करने के लिए एक सशक्त संगठन की आवश्यकता थी।
इसी सोच से ऑल इंडिया ओबीसी रेलवे एम्प्लाइज एसोसिएशन (AIOBCREA) की स्थापना हुई। यह संगठन सिर्फ़ अधिकारों की मांग करने के लिए नहीं, बल्कि ओबीसी कर्मचारियों को एकजुट कर उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाने के उद्देश्य से खड़ा किया गया।
🏛️ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मान्यता
ओबीसी आंदोलन की पृष्ठभूमि मंडल आयोग की सिफारिशों से गहराई से जुड़ी रही। इन्हीं विचारों और संघर्षों से प्रेरित होकर रेलवे कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता दिखाई।
🙏 संस्थापक नेतृत्व एवं योगदान
संगठन के मजबूत स्तंभों ने अपनी दूरदर्शी सोच, त्याग और नेतृत्व क्षमता से ओबीसी संगठन को मज़बूत नींव दी। साथ ही सभी पदाधिकारी एवं सदस्य लगातार संघर्ष और समर्पण से इस संगठन को आगे बढ़ाने में लगे रहे।
🎯 उद्देश्य और लक्ष्य
- ओबीसी रेल कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना।
- पदोन्नति, आरक्षण और समान भागीदारी सुनिश्चित करना।
- सामाजिक न्याय और आत्मसम्मान की आवाज़ को बुलंद करना।
- नई पीढ़ी में जागरूकता और संगठनात्मक चेतना जगाना।
- संगठन के माध्यम से भाईचारा और सहयोग की भावना को मजबूत करना।
🌹 स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ
आज, स्थापना दिवस के अवसर पर मैं, राजीव कुमार (केंद्रीय महासचिव), पूरे संगठन की ओर से
- माननीय मुख्य संरक्षक श्री S.K. यादव जी
- माननीय अध्यक्ष श्री K.S. कुशवाहा जी
- तथा संगठन के सभी पदाधिकारियों और सदस्य
को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।
💡 आज का संदेश
यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब हम संगठित रहते हैं तो किसी भी कठिनाई के सामने डटकर खड़े हो सकते हैं।
- 28 अगस्त 1997 को मिली मान्यता केवल एक तिथि नहीं, बल्कि हमारी एकजुटता, संघर्ष और जीत का प्रतीक है।
- आज हमें संकल्प लेना होगा कि संगठन को और अधिक मज़बूत करेंगे, ताकि भविष्य में भी ओबीसी रेल कर्मचारियों की आवाज़ बुलंद और प्रभावी बनी रहे।
🚩 भविष्य की दिशा
- संगठन को तकनीकी और संगठनात्मक रूप से और अधिक सशक्त बनाना।
- रेलवे प्रशासन व सरकार तक हमारी वास्तविक समस्याओं को प्रखरता से पहुँचाना।
- नई पीढ़ी को जोड़कर संगठन को और भी मज़बूत बनाना।
- पारदर्शिता और लोकतांत्रिक ढांचे के माध्यम से संगठन की विश्वसनीयता को बढ़ाना।
जय भीम – जय मंडल – जय ओबीसी एकता































